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#उपभोक्तानागरिकता #युद्धोत्तरउपनगरिकीकरण #संघीयआवासऋण #शॉपिंगसेंटर #उपभोक्ताअधिकारआंदोलन #AConsumers039Republic
लिज़बेथ कोहेन की ए कंज्यूमर्स रिपब्लिक, द पॉलिटिक्स ऑफ मास कंजम्प्शन इन पोस्टवॉर अमेरिका, उत्तर द्वितीय विश्वयुद्धकालीन संयुक्त राज्य अमेरिका का सामाजिक, राजनीतिक और शहरी इतिहास है. पुस्तक का केंद्रीय तर्क यह है कि युद्ध के बाद उपभोग केवल निजी पसंद या आर्थिक गतिविधि नहीं रहा, बल्कि नागरिकता, अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी को समझने का प्रमुख माध्यम बन गया. कोहेन बताती हैं कि समृद्धि, सरकारी नीतियों, आवास ऋण, उपनगरीय विस्तार और नए खुदरा ढांचों ने नागरिक को पहले उपभोक्ता के रूप में देखने की प्रवृत्ति मजबूत की. इस प्रक्रिया ने अनेक परिवारों को घर, कार और टिकाऊ वस्तुओं तक पहुंच दी, लेकिन नस्ल, वर्ग और स्थान के आधार पर असमानताएं भी गहरी कीं. पुस्तक नागरिक अधिकार सक्रियता, उपभोक्ता आंदोलन, शॉपिंग सेंटर और शहरों के बदलते भूगोल को एक ही विश्लेषण में जोड़ती है. इसका उद्देश्य उपभोक्तावाद की साधारण आलोचना करना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि रोजमर्रा की खरीदारी और सार्वजनिक सत्ता एक दूसरे को कैसे आकार देती हैं.