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#वैश्विकलिक्विडिटी #थोकधनबाजार #रेपोवित्तपोषण #गिरवीकीकमी #शैडोबैंकिंग #CapitalWars
कैपिटल वॉर्स: द राइज़ ऑफ ग्लोबल लिक्विडिटी, माइकल जे. हॉवेल की वैश्विक वित्त और मौद्रिक व्यवस्था पर केंद्रित विश्लेषणात्मक पुस्तक है. इसका मूल तर्क यह है कि आधुनिक आर्थिक चक्रों को समझने के लिए केवल मुद्रास्फीति, नीतिगत ब्याज दरों या पारंपरिक उत्पादन संकेतकों को देखना पर्याप्त नहीं है. हॉवेल के अनुसार निर्णायक शक्ति वैश्विक लिक्विडिटी में निहित है, अर्थात बैंकों, पूंजी बाजारों और थोक धन बाजारों से होकर बहने वाले ऋण तथा अंतरराष्ट्रीय पूंजी के सकल प्रवाह में. पुस्तक बताती है कि ऋण-आधारित वित्तीय व्यवस्था में धन की उपलब्धता, गिरवी योग्य प्रतिभूतियों की गुणवत्ता और पुनर्वित्त की क्षमता, परिसंपत्ति मूल्यों तथा संकटों को गहराई से प्रभावित करती है. केंद्रीय बैंकों, शैडो बैंकिंग, रेपो बाजार और चीन की वित्तीय भूमिका को जोड़कर लेखक एक लिक्विडिटी-प्रथम दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं. इसका उद्देश्य निवेशकों, नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्र के गंभीर पाठकों को आधुनिक बाजारों की उस संरचना से परिचित कराना है, जो अक्सर पारंपरिक आर्थिक व्याख्याओं के बाहर रह जाती है.