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#जलवायुआतंकवाद #लागतलाभविश्लेषण #जलवायुअनुकूलन #ऊर्जागरीबी #स्वच्छतकनीकीनवाचार #FalseAlarm
ब्योर्न लोम्बोर्ग की पुस्तक फॉल्स अलार्म जलवायु परिवर्तन पर लिखी गई एक विवादास्पद, आंकड़ा और अर्थशास्त्र केंद्रित गैर कथा कृति है. इसका मूल तर्क यह नहीं है कि मानव जनित तापवृद्धि असत्य है. लोम्बोर्ग इसे वास्तविक और दीर्घकालिक चुनौती मानते हैं, लेकिन वे उस सार्वजनिक भाषा का विरोध करते हैं जो इसे निकट भविष्य का अपरिहार्य प्रलय बताती है. पुस्तक का ध्यान मुख्यतः इस प्रश्न पर है कि सीमित सार्वजनिक धन, राजनीतिक ध्यान और तकनीकी क्षमता का उपयोग किस प्रकार किया जाए. लेखक जलवायु नीतियों को लागत और लाभ के पैमाने पर परखते हैं, तथा पूछते हैं कि क्या महंगे उत्सर्जन कटौती कार्यक्रम अपने खर्च के अनुपात में तापमान या मानवीय पीड़ा को घटा पाते हैं. वे अंतरराष्ट्रीय जलवायु आकलनों, आर्थिक मॉडलों और विकास संबंधी आंकड़ों के आधार पर तर्क रखते हैं कि अनुकूलन, नवाचार और गरीबी घटाने पर अधिक जोर होना चाहिए. पुस्तक जलवायु विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से अधिक नीति प्राथमिकताओं पर बहस है. इसकी दलीलें व्यापक आलोचना का विषय भी रही हैं, इसलिए इसे सहमति के अंतिम निष्कर्ष के बजाय जलवायु अर्थशास्त्र के एक प्रभावशाली वैकल्पिक दृष्टिकोण के रूप में पढ़ना उचित है.