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#नियोलीबरलवैश्वीकरण #बाजारोंकाआवरण #हैब्सबर्गसाम्राज्यकाविघटन #विश्वव्यापारसंगठन #लोकतंत्रऔरनिजीसंपत्ति #Globalists
क्विन स्लोबोडियन की ग्लोबलिस्ट्स, द एंड ऑफ एम्पायर एंड द बर्थ ऑफ नियोलीबरलिज्म, नियोलीबरल वैश्वीकरण का बौद्धिक इतिहास है. यह पुस्तक प्रचलित धारणा को चुनौती देती है कि नियोलीबरलिज्म केवल राज्य को छोटा करने, नियम हटाने और मुक्त बाजार को स्वतः चलने देने की विचारधारा है. स्लोबोडियन दिखाते हैं कि इसके प्रमुख विचारकों ने राज्य और कानून को समाप्त करने के बजाय उन्हें नए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने की कोशिश की. उनका लक्ष्य राष्ट्रीय लोकतंत्रों के दबाव से पूंजी, व्यापार और निजी संपत्ति को सुरक्षित करना था. कथा प्रथम विश्वयुद्ध के बाद हैब्सबर्ग साम्राज्य के विघटन से शुरू होकर बीसवीं सदी की अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विश्व व्यापार संगठन तक जाती है. फ्रेडरिक हायेक, लुडविग फॉन मीसेस तथा अन्य विचारकों के लेखन, नेटवर्क और संस्थागत कल्पनाओं के माध्यम से पुस्तक बताती है कि साम्राज्य के अंत के बाद बाजार व्यवस्था को वैश्विक नियमों में कैसे बांधने का प्रयास हुआ. यह इतिहास, राजनीतिक अर्थशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अध्ययन को जोड़ने वाली विश्लेषणात्मक पुस्तक है.