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#सकलघरेलूउत्पादकीसीमाएं #आयऔरसंपत्तिकावितरण #जीवनकीबहुआयामीगुणवत्ता #हरितजीडीपीऔरप्राकृतिकपूंजी #टिकाऊआर्थिककल्याण #MismeasuringOurLives
मिसमेज़रिंग आवर लाइव्स, व्हाइ जीडीपी डज़न्ट ऐड अप, अर्थशास्त्र, सार्वजनिक नीति और सामाजिक प्रगति पर केंद्रित एक गैर कथा पुस्तक है. इसे जोसेफ ई. स्टिग्लिट्ज़, अमर्त्य सेन और जाँ पॉल फिटूसी ने उस अंतरराष्ट्रीय आयोग के काम के आधार पर लिखा, जिसे फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने दो हज़ार आठ में गठित किया था. पुस्तक का मूल प्रश्न सीधा है, क्या सकल घरेलू उत्पाद, यानी जीडीपी, किसी देश की वास्तविक प्रगति और लोगों की भलाई का विश्वसनीय पैमाना है. लेखकों का उत्तर है कि जीडीपी आर्थिक गतिविधि को तो दर्ज करता है, पर जीवन की गुणवत्ता को नहीं. यह आय के वितरण, अवैतनिक घरेलू काम, सार्वजनिक सेवाओं, पर्यावरणीय क्षति, सामाजिक असुरक्षा और भविष्य के संसाधनों की स्थिति को पर्याप्त रूप से नहीं दिखाता. पुस्तक केवल जीडीपी को खारिज नहीं करती, बल्कि मापन की भूमिका स्पष्ट करती है. उसका उद्देश्य नीति निर्माताओं को ऐसे संकेतकों की ओर ले जाना है जो वर्तमान कल्याण, असमानता और दीर्घकालिक टिकाऊपन, तीनों को साथ देखकर निर्णय बेहतर बना सकें.