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मार्शल सालिन्स की स्टोन एज इकोनॉमिक्स आर्थिक मानवविज्ञान की एक प्रभावशाली निबंध-संग्रहात्मक कृति है. मूलतः उन्नीस सौ बहत्तर में प्रकाशित और रूटलेज क्लासिक्स संस्करण में डेविड ग्रेबर की भूमिका के साथ उपलब्ध यह पुस्तक उस धारणा को चुनौती देती है कि शिकार और संग्रह पर निर्भर समाज अनिवार्यतः अभावग्रस्त, पिछड़े और निरंतर भूख से जूझते थे. सालिन्स का सबसे चर्चित विचार उन्हें मूल समृद्ध समाज कहना है. उनका तर्क यह नहीं कि इन समुदायों के पास बहुत अधिक वस्तुएं थीं, बल्कि यह कि सीमित जरूरतों, साझा करने की संस्थाओं और अपेक्षाकृत लचीले श्रम के कारण उनकी आवश्यकताएं उपलब्ध साधनों से पूरी हो सकती थीं. पुस्तक उत्पादन, घरेलू जीवन, विनिमय, वितरण और राजनीतिक दायित्वों को एक ही सांस्कृतिक ढांचे में रखकर पढ़ती है. इसलिए यह पारंपरिक अर्थशास्त्र के उस मॉडल पर प्रश्न उठाती है जिसमें हर व्यक्ति को निजी लाभ बढ़ाने वाला स्वतंत्र गणनाकर्ता माना जाता है. यह कोई आदिम अतीत का सरल महिमामंडन नहीं, बल्कि आर्थिक श्रेणियों की सांस्कृतिक सीमाओं की गंभीर जांच है.