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- Amazon India Store: https://www.amazon.in/dp/1952223393?tag=9natreehindi-21
- Amazon Worldwide Store: https://global.buys.trade/Superabundance-Marian-L-Tupy.html
- Apple Books: https://books.apple.com/us/audiobook/sustainable-superabundance-a-universal/id1478346599?itsct=books_box_link&itscg=30200&ls=1&at=1001l3bAw&ct=9natree
- eBay: https://www.ebay.com/sch/i.html?_nkw=Superabundance+Marian+L+Tupy+&mkcid=1&mkrid=711-53200-19255-0&siteid=0&campid=5339060787&customid=9natree&toolid=10001&mkevt=1
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#टाइमप्राइस #सुपरअबंडन्स #जनसंख्यावृद्धि #मानवनवाचार #आर्थिकस्वतंत्रता #Superabundance
सुपरअबंडन्स, मैरियन एल ट्यूपी और गेल एल पूली की अर्थशास्त्र, जनसंख्या और मानव प्रगति पर केंद्रित गैर कथा पुस्तक है. इसका मूल उद्देश्य उस प्रचलित धारणा की जांच करना है कि बढ़ती आबादी अनिवार्य रूप से भोजन, ऊर्जा, धातुओं और अन्य संसाधनों को दुर्लभ बना देती है. लेखक दो शताब्दियों के अनेक वस्तुओं, सेवाओं और जिंसों के मूल्य आंकड़ों का सहारा लेते हैं. वे केवल मुद्रा में दर्ज कीमतों के बजाय टाइम प्राइस, यानी किसी वस्तु को खरीदने के लिए आवश्यक काम के समय, को अधिक उपयोगी माप मानते हैं. उनका निष्कर्ष है कि अनेक मामलों में संसाधन आबादी बढ़ने के साथ अधिक सुलभ हुए हैं, और यह वृद्धि जनसंख्या वृद्धि से भी तेज रही है. पुस्तक का तर्क जूलियन साइमन की उस परंपरा से जुड़ता है जिसमें मानव बुद्धि को अंतिम संसाधन माना गया है. हालांकि इसका दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से आशावादी और विवादास्पद है, पुस्तक का केंद्रबिंदु अंधा आशावाद नहीं, बल्कि नवाचार, बाजार और स्वतंत्र संस्थाओं के बीच संबंध है.