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#अमेरिकीनौसैनिकसुरक्षा #जनसांख्यिकीयगिरावट #वैश्विकआपूर्तिशृंखलाएं #ऊर्जाऔरखाद्यस्वायत्तता #क्षेत्रीयकरण #TheEndoftheWorldIsJusttheBeginning
पीटर ज़ेहान की पुस्तक द एंड ऑफ द वर्ल्ड इज़ जस्ट द बिगिनिंग, मैपिंग द कोलैप्स ऑफ ग्लोबलाइज़ेशन, भू राजनीति, जनसांख्यिकी और आर्थिक इतिहास पर आधारित एक विश्लेषणात्मक गैर कथा कृति है. इसका केंद्रीय तर्क यह है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बनी अमेरिकी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था असाधारण थी, स्वाभाविक या स्थायी नहीं. अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा, डॉलर केंद्रित वित्त और खुले समुद्री व्यापार ने देशों को उत्पादन, ऊर्जा, खाद्य और बाजारों के लिए दूरस्थ साझेदारों पर निर्भर होने दिया. ज़ेहान का अनुमान है कि यह व्यवस्था कमजोर पड़ रही है और आने वाले समय में व्यापार अधिक क्षेत्रीय, महंगा और अस्थिर होगा. पुस्तक केवल मंदी की भविष्यवाणी नहीं करती, बल्कि बताती है कि किसी देश की भूगोलिक स्थिति, उम्र संरचना, संसाधन और सुरक्षा क्षमता उसके विकल्पों को कैसे तय करती है. लेखक विशेष रूप से चीन सहित वृद्ध होती आबादी वाले देशों, लंबी आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा व्यवस्था की असुरक्षा पर ध्यान देते हैं. पुस्तक का उद्देश्य पाठक को एक संभावित विखंडित विश्व व्यवस्था का ढांचा देना है, हालांकि इसके कई समयबद्ध और अत्यंत कठोर पूर्वानुमानों को सावधानी से पढ़ना उचित है.