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- Amazon Worldwide Store: https://global.buys.trade/The-Heart-of-Yoga%3A-Developing-a-Personal-Practice-T-K-V-Desikachar.html
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- eBay: https://www.ebay.com/sch/i.html?_nkw=The+Heart+of+Yoga+Developing+a+Personal+Practice+T+K+V+Desikachar+&mkcid=1&mkrid=711-53200-19255-0&siteid=0&campid=5339060787&customid=9natree&toolid=10001&mkevt=1
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#विनियोग #आसनऔरप्रतिआसन #प्राणायाम #पतंजलियोगसूत्र #योगांजलिसारम #TheHeartofYoga
टी. के. वी. देसिकाचार की द हार्ट ऑफ योग, डेवलपिंग अ पर्सनल प्रैक्टिस आधुनिक योग-साहित्य की एक व्यावहारिक और दार्शनिक पुस्तक है. इसका आधार देसिकाचार के पिता, श्री टी. कृष्णमाचार्य की शिक्षाएं हैं, जिनसे आधुनिक योग की अनेक प्रभावशाली परंपराएं भी जुड़ी रही हैं. पुस्तक का केंद्रीय सिद्धांत विनियोग है, अर्थात योगाभ्यास को किसी स्थिर, एकरूप ढांचे में बांधने के बजाय व्यक्ति की वर्तमान जरूरतों के अनुसार ढालना. उम्र, स्वास्थ्य, कामकाजी जीवन, ऊर्जा, क्षमता और जीवन-परिस्थितियां बदलती हैं, इसलिए अभ्यास भी बदलना चाहिए. देसिकाचार आसन, श्वास, प्राणायाम, बंध, ध्यान और योग-दर्शन को अलग-अलग कौशल नहीं मानते, बल्कि एक समन्वित व्यक्तिगत साधना के अंगों के रूप में प्रस्तुत करते हैं. पुस्तक में पतंजलि के योगसूत्र का अनुवाद और व्याख्या, तथा कृष्णमाचार्य रचित योगांजलिसारम भी शामिल है. इसका उद्देश्य केवल मुद्राएं सिखाना नहीं, बल्कि पाठक को सुरक्षित, क्रमबद्ध और अर्थपूर्ण योग-अभ्यास रचने की समझ देना है.