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#पूंजीवादकीआत्मा #प्रोटेस्टेंटकार्यनैतिकता #कॉलिंग #पूर्वनियति #सांसारिकतपस्या #TheProtestantEthicandtheSpiritofCapitalism
मैक्स वेबर की द प्रोटेस्टेंट एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैपिटलिज्म आधुनिक समाजशास्त्र की एक प्रभावशाली और विवादास्पद कृति है. यह मूलतः उन्नीस सौ चार से उन्नीस सौ पाँच के बीच प्रकाशित निबंधों के रूप में सामने आई थी. पुस्तक का केंद्रीय प्रश्न यह है कि आधुनिक पश्चिमी पूंजीवाद को केवल बाजार, तकनीक या धन से नहीं, बल्कि विशेष नैतिक और धार्मिक विचारों से भी कैसे समझा जाए. वेबर खास तौर पर कैल्विनवाद और अन्य तपस्वी प्रोटेस्टेंट धाराओं की उन मान्यताओं का अध्ययन करते हैं, जिन्होंने काम को धार्मिक कर्तव्य, अनुशासन को सद्गुण और लाभ के पुनर्निवेश को नैतिक रूप से स्वीकार्य बनाया. उनका तर्क यह नहीं है कि प्रोटेस्टेंट धर्म ने अकेले पूंजीवाद पैदा किया. बल्कि वे दिखाते हैं कि कुछ धार्मिक विचारों ने ऐसी आर्थिक मानसिकता को बल दिया जो तर्कसंगत, नियमित और निरंतर लाभोन्मुख आधुनिक उद्यम के लिए अनुकूल थी. यह इतिहास, धर्म, अर्थव्यवस्था और सामाजिक सिद्धांत के संगम पर लिखी विश्लेषणात्मक पुस्तक है. इसका उद्देश्य किसी धर्म का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि विचारों और संस्थाओं के पारस्परिक प्रभाव को समझना है.