[समीक्षा] The Theory of Moral Sentiments (Adam Smith) सारांशित.

[समीक्षा] The Theory of Moral Sentiments  (Adam Smith) सारांशित.
9Natree Hindi
[समीक्षा] The Theory of Moral Sentiments (Adam Smith) सारांशित.

Aug 08 2026 | 00:09:37

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Episode August 08, 2026 00:09:37

Show Notes

The Theory of Moral Sentiments (Adam Smith)

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#सहानुभूति #निष्पक्षदर्शक #आत्मसंयम #उचितप्रशंसा #न्यायऔरउपकार #TheTheoryofMoralSentiments

एडम स्मिथ की द थ्योरी ऑफ मॉरल सेंटिमेंट्स पहली बार सत्रह सौ उनसठ में प्रकाशित नैतिक दर्शन की केंद्रीय कृति है. इसे स्मिथ की द वेल्थ ऑफ नेशंस का विरोध नहीं, बल्कि आवश्यक पूरक समझना चाहिए. जहां उनका आर्थिक लेखन विनिमय, हित और संस्थाओं का विश्लेषण करता है, वहीं यह पुस्तक पूछती है कि मनुष्य किसी आचरण को उचित, अनुचित, प्रशंसनीय या निंदनीय क्यों मानता है. स्मिथ का उत्तर केवल निजी स्वार्थ या अमूर्त तर्क पर आधारित नहीं है. वे सहानुभूति, सामाजिक स्वीकृति, आत्मसंयम और निष्पक्ष निर्णय की क्षमता को नैतिक जीवन के आधार के रूप में रखते हैं. पुस्तक यह भी दिखाती है कि लोग दूसरों के दुःख और सुख के साथ कल्पनाशील रूप से जुड़ते हुए अपने व्यवहार को नियंत्रित करना सीखते हैं. पेंगुइन क्लासिक्स संस्करण में अमर्त्य सेन की भूमिका और रायन पैट्रिक हैनली का संपादन इस कठिन, अठारहवीं सदी के गद्य को आधुनिक नैतिक और राजनीतिक बहसों से जोड़ने में सहायक हैं. इसका उद्देश्य तैयार नियम देना नहीं, बल्कि नैतिक निर्णय बनने की मानवीय प्रक्रिया को समझना है.

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