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#नियोक्लासिकलअर्थशास्त्र #केन्सियनसमग्रमांग #मार्क्सियनवर्गविश्लेषण #अधिशेषकानियंत्रण #कार्यस्थलआर्थिकलोकतंत्र #ContendingEconomicTheories
रिचर्ड डी. वोल्फ और स्टीफन ए. रेज़निक की पुस्तक कंटेंडिंग इकोनॉमिक थियोरीज़ अर्थशास्त्र की तीन प्रभावशाली परंपराओं, नियोक्लासिकल, केन्सियन और मार्क्सियन विचारधाराओं, का तुलनात्मक अध्ययन है. एमआईटी प्रेस से प्रकाशित यह पुस्तक केवल सिद्धांतों की परिभाषाएं नहीं देती, बल्कि यह दिखाती है कि अर्थव्यवस्था को समझने का शुरुआती दृष्टिकोण बदलते ही समस्याओं, प्रमाणों और नीतियों के अर्थ भी बदल जाते हैं. लेखक प्रत्येक परंपरा की अपनी भाषा, लक्ष्य, आंतरिक तर्क और सीमाओं को अलग अलग रूप में रखते हैं. फिर वे बेरोजगारी, बाजार, राज्य की भूमिका, वितरण और उत्पादन में वर्ग संबंध जैसे प्रश्नों पर इनके टकराव को स्पष्ट करते हैं. पुस्तक का केंद्रीय आग्रह है कि अर्थशास्त्र को एकमात्र निर्विवाद विज्ञान मानने के बजाय प्रतिस्पर्धी सिद्धांतों के क्षेत्र के रूप में पढ़ा जाए. विशेष रूप से, मार्क्सियन अध्याय उत्पादन के भीतर मालिक और श्रमिक के संबंधों, अधिशेष के नियंत्रण और आर्थिक लोकतंत्र के प्रश्न को सामने लाता है. इसलिए यह पाठ्यपुस्तक, वैचारिक आलोचना और सार्वजनिक नीति के विश्लेषण का संयोजन है.