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हांस हेरमान होप्पे की दो हजार एक में प्रकाशित पुस्तक डेमोक्रेसी, द गॉड दैट फेल्ड राजनीतिक दर्शन और ऑस्ट्रियन अर्थशास्त्र पर आधारित तेरह निबंधों का संकलन है. इसका केंद्रीय उद्देश्य आधुनिक लोकतंत्र को स्वतः प्रगति मानने वाली धारणा पर प्रश्न उठाना है. होप्पे लोकतांत्रिक शासन को सार्वजनिक स्वामित्व वाली सरकार और राजतंत्र को निजी स्वामित्व वाली सरकार के रूप में देखते हैं. उनके अनुसार निर्वाचित शासकों के छोटे कार्यकाल उन्हें तात्कालिक लाभ, अधिक कर, ऋण और पुनर्वितरण की ओर प्रेरित करते हैं, जबकि वंशानुगत शासक अपने क्षेत्र के दीर्घकालिक मूल्य को बचाने का अपेक्षाकृत अधिक प्रोत्साहन रख सकता है. फिर भी पुस्तक का अंतिम आदर्श राजतंत्र नहीं है. होप्पे दोनों व्यवस्थाओं को राज्य की जबरदस्ती और कराधान से ग्रस्त मानते हुए निजी संपत्ति, स्वैच्छिक अनुबंध और प्रतिस्पर्धी न्यायिक व्यवस्थाओं पर आधारित प्राकृतिक व्यवस्था का समर्थन करते हैं. यह पुस्तक जानबूझकर विवादास्पद है, विशेषकर सार्वभौम मताधिकार, प्राकृतिक अभिजात वर्ग और सामाजिक समावेशन पर अपने विचारों के कारण. इसलिए इसे तर्कों की कठोर जांच के साथ पढ़ना आवश्यक है.