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#उग्रअज्ञान #आत्मछल #बलिकाबकरा #भावनात्मकशक्तिकादुरुपयोग #सम्मानजनकमुखौटा #PeopleoftheLieVol1
एम. स्कॉट पेक की पुस्तक पीपल ऑफ द लाई, टुवर्ड अ साइकोलॉजी ऑफ ईविल, पहली बार उन्नीस सौ तिरासी में प्रकाशित हुई थी. यह लोकप्रिय मनोविज्ञान, मनोचिकित्सकीय चिंतन और धार्मिक नैतिकता के संगम पर लिखी गई गैर कथा पुस्तक है. पेक का केंद्रीय प्रयास बुराई को केवल अपराध, हिंसा या अंतरात्मा के पूर्ण अभाव के रूप में देखने के बजाय, एक ऐसे लगातार आत्मछल के रूप में समझना है जो व्यक्ति को अपनी नैतिक कमियों का सामना करने से रोकता है. वे अपने नैदानिक अनुभवों और व्यापक सामाजिक टिप्पणियों के सहारे कहते हैं कि कुछ विनाशकारी लोग बाहरी रूप से सम्मानित, स्नेही और सामान्य दिख सकते हैं. पुस्तक का उद्देश्य किसी असहमति रखने वाले व्यक्ति को बुरा ठहराना नहीं, बल्कि झूठ, दोषारोपण, नियंत्रण और बलि का बकरा बनाने जैसी प्रवृत्तियों को पहचानने के लिए एक नैतिक मनोवैज्ञानिक भाषा देना है. साथ ही, पेक पाठक को अपनी आत्मधार्मिकता और दूसरों पर जल्दबाजी में लेबल लगाने की प्रवृत्ति की जांच करने को भी कहते हैं.