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- Amazon India Store: https://www.amazon.in/dp/0691224293?tag=9natreehindi-21
- Amazon Worldwide Store: https://global.buys.trade/The-Profit-Paradox%3A-How-Thriving-Firms-Threaten-the-Future-of-Work-Jan-Eeckhout.html
- Apple Books: https://books.apple.com/us/audiobook/the-both-and-god-how-christianity-thrives-on-paradox/id6780939359?itsct=books_box_link&itscg=30200&ls=1&at=1001l3bAw&ct=9natree
- eBay: https://www.ebay.com/sch/i.html?_nkw=The+Profit+Paradox+How+Thriving+Firms+Threaten+the+Future+of+Work+Jan+Eeckhout+&mkcid=1&mkrid=711-53200-19255-0&siteid=0&campid=5339060787&customid=9natree&toolid=10001&mkevt=1
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#बाजारशक्ति #मोनोप्सनी #ऊंचेमार्जिन #विजेतासबकुछलेजाताहै #एंटीट्रस्टप्रवर्तन #TheProfitParadox
द प्रॉफिट पैराडॉक्स अर्थशास्त्री यान एकहाउट की गैर कथा पुस्तक है, जो यह जांचती है कि अत्यधिक सफल और लाभकारी कंपनियां व्यापक अर्थव्यवस्था तथा कामकाजी लोगों के लिए समस्या कैसे बन सकती हैं. पुस्तक का मुख्य प्रश्न सरल है, तकनीक ने उत्पादन को अधिक कुशल बनाया है, फिर भी अनेक देशों में वेतन वृद्धि कमजोर, कीमतें अपेक्षाकृत ऊंची और असमानता अधिक क्यों दिखती है. एकहाउट का उत्तर बाजार शक्ति के बढ़ने में है. उनके अनुसार कुछ बड़ी कंपनियां अपनी उत्पादकता, नेटवर्क प्रभावों, डेटा और कमजोर प्रतिस्पर्धा नीतियों के कारण ऐसे स्थान पर पहुंच गई हैं जहां वे लागत से काफी ऊपर मूल्य तय कर सकती हैं और श्रम बाजार में भी शर्तें प्रभावित कर सकती हैं. यह पुस्तक लाभ के विरुद्ध तर्क नहीं देती. इसका तर्क है कि प्रतिस्पर्धी बाजार में नवाचार से मिली लागत बचत का बड़ा हिस्सा ग्राहकों, कर्मचारियों और नए उद्यमों तक पहुंचना चाहिए. जब वह हिस्सा मुख्यतः कुछ फर्मों के मुनाफे में रुक जाए, तब आर्थिक प्रगति का सामाजिक लाभ सीमित हो जाता है. अकादमिक शोध, रोजमर्रा के उत्पादों और श्रम बाजार के उदाहरणों के सहारे पुस्तक प्रतिस्पर्धा, मजदूरी और लोकतांत्रिक नीति के संबंध को स्पष्ट करती है.