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डेविड एल. बान्सेन की देअर्स नो फ्री लंच, टू हंड्रेड फिफ्टी इकोनॉमिक ट्रूथ्स, अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीति पर केंद्रित एक संक्षिप्त वैचारिक संकलन है. पुस्तक में प्रमुख मुक्त-बाजार अर्थशास्त्रियों के विचारों और उद्धरणों को ढाई सौ छोटे खंडों में रखा गया है, जिनके साथ बान्सेन की व्याख्या जुड़ी है. इसका उद्देश्य तकनीकी गणित या जटिल मॉडल के बजाय उन बुनियादी सिद्धांतों को स्पष्ट करना है जिनसे कीमतें, काम, व्यापार, निवेश, मजदूरी और सरकारी हस्तक्षेप प्रभावित होते हैं. बान्सेन का दृष्टिकोण स्पष्टतः रूढ़िवादी, मुक्त-उद्यम समर्थक और ईसाई नैतिकता से प्रभावित है. वे तर्क देते हैं कि किसी आर्थिक नीति का मूल्यांकन उसके घोषित इरादों से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक परिणामों से होना चाहिए. पुस्तक विशेष रूप से अभाव, प्रोत्साहन, श्रम-विभाजन, न्यूनतम मजदूरी, क्रोनी कैपिटलिज्म और समाजवाद जैसे विषयों पर ध्यान देती है. इसका रूप इसे सामान्य पाठक के लिए सुगम बनाता है, हालांकि इसका वैचारिक रुख किसी निष्पक्ष पाठ्यपुस्तक जैसा नहीं है.