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एडम लीबोर की पुस्तक टावर ऑफ बेसल, द शैडोई हिस्ट्री ऑफ द सीक्रेट बैंक दैट रन्स द वर्ल्ड, बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स, यानी बीआईएस, का ऐतिहासिक और खोजपरक अध्ययन है. बीआईएस को अक्सर केंद्रीय बैंकों का बैंक कहा जाता है, क्योंकि यह विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग, वित्तीय सेवाओं और नीति संवाद का मंच उपलब्ध कराता है. लीबोर का उद्देश्य इसे किसी गुप्त षड्यंत्र की कहानी बनाना नहीं है. वे अभिलेखों, सार्वजनिक दस्तावेजों और ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर पूछते हैं कि इतनी प्रभावशाली संस्था सार्वजनिक निगरानी से इतनी दूर कैसे रही. पुस्तक बीआईएस की स्थापना, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उसके विवादास्पद व्यवहार, और युद्धोत्तर वित्तीय व्यवस्था में उसके बढ़ते प्रभाव को जोड़ती है. इसका केंद्रीय प्रश्न मौद्रिक नीति से अधिक व्यापक है. जब विशेषज्ञ संस्थाएं सीमापार निर्णयों को प्रभावित करती हैं, तब उनकी वैधता, पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे तय होनी चाहिए. इसलिए यह वित्तीय इतिहास, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और संस्थागत शक्ति का गंभीर विश्लेषण है.