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- Amazon Worldwide Store: https://global.buys.trade/The-Crisis-of-Democratic-Capitalism-Martin-Wolf.html
- Apple Books: https://books.apple.com/us/audiobook/the-crisis-of-democratic-capitalism-unabridged/id1632350362?itsct=books_box_link&itscg=30200&ls=1&at=1001l3bAw&ct=9natree
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#लोकतांत्रिकपूंजीवाद #एकव्यक्तिएकवोट #आर्थिकअसमानता #फ्लेक्ससिक्योरिटी #लोकलुभावनअधिनायकवाद #TheCrisisofDemocraticCapitalism
मार्टिन वुल्फ की पुस्तक द क्राइसिस ऑफ डेमोक्रेटिक कैपिटलिज्म समकालीन राजनीतिक अर्थव्यवस्था का विश्लेषण करने वाली एक गंभीर गैर कथा कृति है. फाइनेंशियल टाइम्स के मुख्य आर्थिक टिप्पणीकार वुल्फ इसमें उस व्यवस्था की पड़ताल करते हैं जिसमें बाजार आधारित पूंजीवाद और उदार लोकतंत्र लंबे समय तक एक दूसरे के सहायक बने रहे. उनका केंद्रीय तर्क है कि यह संबंध अब गहरे तनाव में है. लोकतंत्र नागरिकों को बराबर राजनीतिक अधिकार देता है, जबकि पूंजीवाद संपत्ति और बाजार शक्ति को असमान रूप से बांटता है. युद्धोत्तर काल में कल्याणकारी राज्य, प्रगतिशील कराधान, श्रम संस्थाएं और सार्वजनिक सेवाएं इस अंतर को संभालते थे. लेकिन बढ़ती असमानता, वित्तीय संकटों, ठहरी हुई आय और संस्थागत अविश्वास ने उस संतुलन को कमजोर किया है. वुल्फ न तो बाजार व्यवस्था को छोड़ने की वकालत करते हैं, न लोकतंत्र को अप्रभावी मानते हैं. पुस्तक का उद्देश्य यह समझाना है कि दोनों को साथ बचाने के लिए अधिक समावेशी अर्थव्यवस्था, उत्तरदायी संस्थाएं और नागरिकता पर आधारित साझा सार्वजनिक उद्देश्य क्यों आवश्यक हैं.